अरावली मामले में मुख्य न्यायाधीश ने पूछा : मेरी रिटायरमेंट तक टालना चाहते हो? 

अरावली की पहाड़ियों और वहां होने वाली माइनिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाई पावर्ड कमेटी के अरावली की परिभाषा तय करने वाली अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 6 महीने का अतिरिक्त समय मांगने पर पूछा, “मेरी रिटायरमेंट तक टालना चाहते हो?”

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह तो सीधे-सीधे मामले को मेरी रिटायरमेंट तक ठंडे बस्ते में डालने की साजिश है। उन्होंने कहा, “कमेटी ने तो बेसिकली मेरी रिटायरमेंट के बाद की ही तारीख मांग ली है।”

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को रिटायर हो रहे हैं और कमेटी ने 28 फरवरी 2027 तक का समय माँगा।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कमेटी की 6 महीने वाली अर्जी को सीधे खारिज कर दिया और उसे अंतिम रिपोर्ट 30 नवंबर तक पेश करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस दौरान राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों समेत सभी स्टेकहोल्डर्स की बात सुनी जाए। अगर कोई अर्जेंट मुद्दा है तो उसके लिए बीच-बीच में अंतरिम रिपोर्ट दी जा सकती है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को करने की घोषणा की।

20 नवंबर 2025 के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की बेंच ने अरावली की एक नई परिभाषा को मंजूरी दी थी, उस फैसले के मुताबिक:

• 100 मीटर से ऊंची पहाड़ी: सिर्फ उसी जमीन को अरावली पहाड़ी माना गया जिसकी स्थानीय सतह से ऊंचाई 100 मीटर या उससे ज्यादा हो।

• अरावली रेंज: 500 मीटर के दायरे में आने वाली दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियों को ही रेंज माना जाएगा।

इस फैसले की आलोचना हुई और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। पर्यावरणविदों के अनुसार इस 100 मीटर वाली कसौटी से अरावली का 90% से ज्यादा इलाका सुरक्षा दायरे से बाहर हो जाएगा।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने 29 दिसंबर 2025 को पुराने फैसले पर रोक लगा दी और इस साल मई में एक नई हाई पावर्ड कमेटी बनाई, जिसे 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देनी थी।

(जनचौक ब्यूरो)

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